1900 के दशक की शुरुआत में प्रवास
परीक्षा में नहीं यह भाग पढ़ने लायक है, पर नागरिकता परीक्षा इसके बारे में कभी नहीं पूछती।
प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध के बीच की अवधि में ऑस्ट्रेलिया में प्रवेश की प्रतिबंधात्मक शर्तें बनी रहीं। फिर भी, दक्षिणी यूरोप से लोगों का, विशेष रूप से पुरुषों का, प्रवास बढ़ा। वे अपने साथ अनेक कौशल, शिक्षा और अपने सांस्कृतिक मूल्य लाए। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के ग्रामीण उद्योगों को विकसित करने में मदद की तथा सड़कें और रेलमार्ग बनाए। कुशल इतालवी पत्थर-कारीगरों ने सार्वजनिक भवनों और निवासों के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
1930 के दशक के अंत में यूरोप से यहूदी शरणार्थी आने लगे। वे नाज़ी जर्मनी के ख़तरे से भाग रहे थे। वे जर्मनी, ऑस्ट्रिया, चेकोस्लोवाकिया, हंगरी और पोलैंड से आए। उनमें से कई उच्च शिक्षित थे और उन्होंने ऑस्ट्रेलिया की अर्थव्यवस्था तथा सांस्कृतिक जीवन में बहुत योगदान दिया।
द्वितीय विश्व युद्ध में पकड़े गए लगभग 18,000 इतालवी सैनिकों को ऑस्ट्रेलिया के युद्धबंदी शिविरों में रखा गया। वे शिविरों में थोड़े ही समय रहे, पर उनके साथ उचित व्यवहार हुआ और कई लोगों ने इस भूमि और यहाँ के लोगों के बारे में कुछ जाना। युद्ध के बाद उनमें से कई प्रवासी बनकर ऑस्ट्रेलिया लौट आए।
आधिकारिक पुस्तिका Australian Citizenship: Our Common Bond से