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ऐतिहासिक पड़ाव · 1 मिनट का पाठ

एबोरिजिनल रिज़र्व (Aboriginal reserves)

परीक्षा में नहीं यह भाग पढ़ने लायक है, पर नागरिकता परीक्षा इसके बारे में कभी नहीं पूछती।

आदिवासी लोगों और बसने वालों के बीच ज़मीन को लेकर हुई शुरुआती लड़ाइयों के बाद, आदिवासी लोगों को समाज के हाशिये पर रहने के लिए मजबूर किया गया। कुछ लोग आउटबैक के भेड़ और मवेशी फ़ार्मों पर बहुत कम मज़दूरी पर काम करते थे, जो कई मामलों में कभी दी ही नहीं गई। औपनिवेशिक सरकारों ने रिज़र्व बनाए जहाँ आदिवासी लोग रह सकते थे, लेकिन ये इलाक़े उन्हें अपना पारंपरिक जीवन जीने नहीं देते थे। उदाहरण के लिए, वे अपनी इच्छा के अनुसार शिकार और संग्रह करने के लिए स्वतंत्र नहीं थे।

1800 के दशक के अंत में औपनिवेशिक सरकारों ने आदिवासी और टोरेस स्ट्रेट आइलैंडर लोगों (Aboriginal and Torres Strait Islander peoples) के अधिकार छीन लिए। वे नियंत्रित करते थे कि आदिवासी और टोरेस स्ट्रेट आइलैंडर लोग कहाँ रह सकते हैं और किससे विवाह कर सकते हैं। उन्होंने कई आदिवासी और टोरेस स्ट्रेट आइलैंडर बच्चों को उनके माता-पिता से छीनकर 'श्वेत' परिवारों या सरकारी अनाथालयों में भेज दिया। ऐसी नीतियाँ 20वीं सदी के मध्य तक जारी रहीं। इन 'चुराई गई पीढ़ियों' (stolen generations) का मुद्दा कई आदिवासी और टोरेस स्ट्रेट आइलैंडर लोगों तथा अन्य ऑस्ट्रेलियाई लोगों के लिए गहरे दुःख का कारण बना हुआ है, और 2008 में ऑस्ट्रेलियाई संसद में इसके लिए राष्ट्रीय क्षमायाचना की गई थी।

आधिकारिक पुस्तिका Australian Citizenship: Our Common Bond से