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स्नोई माउंटेंस जल-विद्युत योजना (The Snowy Mountains Hydro-Electric Scheme) · 3 मिनट का पाठ

एबोरिजिनल और टोरेस स्ट्रेट आइलैंडर लोगों के साथ व्यवहार

परीक्षा में नहीं यह भाग पढ़ने लायक है, पर नागरिकता परीक्षा इसके बारे में कभी नहीं पूछती।

1940 और 1950 के दशकों में एबॉरिजिनल तथा टॉरेस स्ट्रेट आइलैंडर लोगों (Aboriginal and Torres Strait Islander peoples) के प्रति सरकार की नीति समावेशन यानी आत्मसातीकरण (assimilation) की थी। इसका अर्थ था कि एबॉरिजिनल और टॉरेस स्ट्रेट आइलैंडर लोगों से कहा गया कि वे ग़ैर-मूलनिवासी आबादी की तरह ही जीवन जिएँ। यह सफल नहीं हुआ क्योंकि वे अपनी पारंपरिक संस्कृतियाँ खोना नहीं चाहते थे।

1960 के दशक में यह नीति बदलकर एकीकरण (integration) की हो गई। ऑस्ट्रेलिया में अधिकांश पुरुषों को 1850 के दशक में मतदान का अधिकार मिल गया था, लेकिन कॉमनवेल्थ (Commonwealth) स्तर पर मतदान का अधिकार सभी एबॉरिजिनल लोगों को 1962 तक नहीं मिला। इस एकीकरण के तहत एबॉरिजिनल लोगों को नागरिक स्वतंत्रताएँ दी गईं, पर उनसे फिर भी अपेक्षा की जाती थी कि वे ग़ैर-मूलनिवासी ऑस्ट्रेलियाई संस्कृति के अनुरूप ढल जाएँ।

1967 में 90 प्रतिशत से अधिक ऑस्ट्रेलियाई लोगों ने एक ऐतिहासिक जनमत-संग्रह में ‘हाँ’ में वोट दिया, जिससे एबॉरिजिनल और टॉरेस स्ट्रेट आइलैंडर लोगों को ऑस्ट्रेलिया की हर पाँच साल में होने वाली जनगणना (Census of Population and Housing) में गिना जा सका। इससे पता चला कि उस समय ऑस्ट्रेलियाई लोगों का विशाल बहुमत मानता था कि एबॉरिजिनल और टॉरेस स्ट्रेट आइलैंडर लोगों को वही अधिकार मिलने चाहिए जो सबको मिले हैं।

समाज के मूल्यों के इस विस्तार और एबॉरिजिनल लोगों के मज़बूत विरोध के कारण एबॉरिजिनल और टॉरेस स्ट्रेट आइलैंडर लोगों से जुड़ी नीतियाँ बनाने में आत्मनिर्णय (self-determination) एक प्रमुख मार्गदर्शक सिद्धांत के रूप में अपनाया गया। सरकार ने माना कि एबॉरिजिनल और टॉरेस स्ट्रेट आइलैंडर लोगों का अपने राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विकास में अपनी बात रखना महत्वपूर्ण है।

भूमि अधिकारों को लेकर विरोध 1960 के दशक में नॉर्दर्न टेरिटरी के वेव हिल (Wave Hill) में हुई गुरिंजी हड़ताल (Gurindji Strike) से जनता का ध्यान खींचने लगा। विन्सेंट लिंगियारी (Vincent Lingiari) के नेतृत्व में एबॉरिजिनल पशु-चरवाहों ने वेतन और काम की परिस्थितियों के विरोध में मवेशी फ़ार्म पर काम छोड़ दिया। उनके इस कदम ने एडी माबो (Eddie Mabo) और अन्य लोगों के लिए भूमि अधिकारों की लड़ाई का रास्ता खोला।

1976 के एबॉरिजिनल लैंड राइट्स (नॉर्दर्न टेरिटरी) अधिनियम (Aboriginal Land Rights (Northern Territory) Act) के तहत एबॉरिजिनल लोगों को ऑस्ट्रेलिया के भीतरी इलाक़ों में ज़मीन के क्षेत्र दिए गए। 1990 के दशक की शुरुआत में हाई कोर्ट के माबो निर्णय (Mabo decision) और नेटिव टाइटल एक्ट 1993 (Native Title Act 1993) ने माना कि एबॉरिजिनल और टॉरेस स्ट्रेट आइलैंडर लोगों का अपने पारंपरिक क़ानूनों और रीति-रिवाजों के आधार पर भूमि पर दावा है।

ऑस्ट्रेलिया का बढ़ता हुआ हिस्सा नेटिव टाइटल (native title) निर्धारणों के अंतर्गत आता है। इन क्षेत्रों में पारंपरिक समाज के पहलू आज भी जारी हैं।

मई 1997 में ‘ब्रिंगिंग देम होम’ (Bringing them home) रिपोर्ट ऑस्ट्रेलियाई संसद में प्रस्तुत की गई। यह रिपोर्ट उस जाँच का परिणाम थी जो एबॉरिजिनल और टॉरेस स्ट्रेट आइलैंडर बच्चों को बड़ी संख्या में उनके परिवारों से अलग किए जाने के बारे में की गई थी। ये बच्चे ‘स्टोलन जेनरेशन्स’ (Stolen Generations) के नाम से जाने गए। इस रिपोर्ट के परिणामस्वरूप हज़ारों ऑस्ट्रेलियाई लोगों ने 1998 में पहले राष्ट्रीय ‘सॉरी डे’ (Sorry Day) पर एक साथ मार्च करके अपने मूलनिवासी साथी ऑस्ट्रेलियाई लोगों के प्रति समर्थन दिखाया।

आधिकारिक पुस्तिका Australian Citizenship: Our Common Bond से